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प्रकाश का विद्युत-चुम्बकीय सिद्धांत ब्रिटेन के महान वैज्ञानिक जेम्स क्लार्क मैक्सवेल (James Clerk Maxwell) द्वारा सन् 1865 में प्रतिपादित किया था।

James Clerk Maxwell Short Biography

प्रकाश के वास्तविक रूप को समझ पाना न्यूटन के समय से ही वैज्ञानिकों के लिए एक जटिल गुत्थी रहा था। इसके लिए विभिन्न वैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न अवधारणाएं प्रस्तुत की थी। किसी ने प्रकाश की व्याख्या कणों के रूप में की तो किसी ने इसे तरंगों के रूप में व्याख्यायित किया। अधिकतर वैज्ञानिकों ने प्रकाश को चलने के लिए ईथर जैसे, माध्यम की कल्पना की।

मैक्सवेल से पहले प्रकाश को समझने के लिए जितने भी सिद्धांत प्रस्तुत किए गए वे सब किसी न किसी रूप में अधूरे ही थे। इस गुत्थी को सुलझाया ब्रिटेन के वैज्ञानिक जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने। उन्होंने प्रकाश का विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत प्रतिपादित किया जो सभी प्रयोगों की कसौटी पर खरा उतरा। अपने इस सिद्धांत के द्वारा ही मैक्सवेल विश्व के महानतम वैज्ञानिकों की श्रेणी में आ गए।

कौन जानता था कि गांव में जन्मा एक सीधा-सादा बालक एक दिन विज्ञान का ऐसा सिद्धांत प्रस्तुत करेगा जो विश्व भर में उसके नाम का डंका बजा देगा और भौतिकी की अनेक समस्याओं का समाधान कर देगा। मैक्सवेल बचपन में बहुत ही सीधे-साधे थे और साधारण कपड़े पहनते थे। इसलिए उनके सहपाठी उन्हें ‘दफती’ (मूर्ख) कहकर चिढ़ाते थे।

इनका जन्म ब्रिटेन के एडिनबर्ग नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता ग्लैनेयर एक धनी व्यक्ति थे। दुर्भाग्यवश जब इनकी उम्र केवल 8 वर्ष की ही थी तभी इनकी मां की मृत्यु हो गई। मां का साया उठ जाने के बाद इनकी देख-रेख इनके पिता को ही करनी पड़ी।

बचपन से ही इनको प्रकृति से विशेष लगाव था। इन्हें झील, पहाड़ियों और झरनों को देखने का बड़ा शौक था। प्रकृति के रंग-बिरंगे दृश्यों को देखकर वे उनमें डूब जाते थे और उनके विषय में कुछ न कुछ सोचते रहते थे। निश्चय ही प्रकृति के इन रंग-बिरंगे दृश्यों ने उनकी प्रतिभा को विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाई। शायद यह प्रकृति का ही उपहार था कि आगे चलकर उन्होंने विविध रंगों को एक समीकरण में बांधने में सफलता प्राप्त की।

विद्वता के लक्षण इस वैज्ञानिक में किशोरावस्था में ही प्रकट होने लगे थे। 15 वर्ष की उम्र में ही इन्होंने काटीशियन ओवल बनाने की एक यांत्रिक विधि खोज निकाली थी। काटीशियन ओवल ज्यामिति में एक विशेष प्रकार का वक्र होता है। इस यांत्रिक विधि से संबंधित उन्होंने एक शोध पत्र तैयार किया जिसे उन्होंने रॉयल सोसाइटी के समक्ष पढ़ा था।

18 वर्ष की उम्र में उन्होंने रोलिंग कर्व और लचीले ठोसों की साम्यवस्था के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान किए। इन विषयों पर लिखे शोध पत्र भी इन्होंने रॉयल सोसाइटी के समक्ष प्रस्तुत किए थे। इन्होंने शनि के छल्लों से संबंधित एक सनसनीखेज निबंध लिखा था। इसके लिए इन्हें ‘एडम पुरस्कार’ प्रदान किया गया।

मैक्सवेल की प्रतिभा का वास्तविक विकास तब हुआ जब वे स्कॉटिश वैज्ञानिक ‘निकोल’ के सम्पर्क में आए। वास्तव में निकोल इनके लिए महान गुरू सिद्ध हुए। निकोल द्वारा बनाए निकोल प्रिज्म पर इन्होंने शोध कार्य प्रारम्भ किया, जिससे शोध करने की इनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति का अत्याधिक विकास हुआ। उन्हीं के साथ इन्होंने सन् 1855 में वर्णान्धता (Color Blindness) पर शोध पत्र प्रकाशित किए।

मैक्सवेल की सबसे महत्वपूर्ण खोज थी – प्रकाश का विद्युत-चुम्बकीय सिद्धांत। इस सिद्धांत पर कार्य करने की प्ररेणा उन्हें Michael Faraday से मिली थी। माइकल फैराडे को को स्वयं यह अहसास हो गया था कि प्रकाश एक विद्युत-चुम्बकीय घटना है लेकिन अधिक शिक्षित न होने के कारण वे इसका कोई गणितीय आधार प्रस्तुत न कर पाए।

मैक्सवेल ने प्रकाश की विद्युत चुम्बकीय प्रवृत्ति को समझने के लिए अनेक प्रयोग किए और फिर इसे गणितीय रूप से प्रस्तुत किया। इस विषय से संबंधित उन्होंने अपने परिणाम ‘A Dynamical Theory of the Electromagnetic Field’ के नाम से प्रकाशित किए। इसके 8 वर्ष बाद उन्होंने इसी विषय पर एक महान ग्रन्थ ‘A Treatise on Electricity and Magnetism’ लिखा।

मैक्सवेल की विद्युत-चुम्बकीय तरंगे ईथर के लचीले माध्यम से संचरित होती थी। बाद में ईथर माध्यम की संकल्पना निराधार सिद्ध हो गई लेकिन इनका विद्युत चुम्बकत्व सिद्धांत आज भी हर कसौटी पर सत्य उतरता है।

विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अतिरिक्त इन्होंने एक चकती का निर्माण किया जो मैक्सवेल चकती के नाम से प्रसिद्ध हुई। इन्होंने गैसों का गतिज ऊर्जा सिद्धांत औसत मुक्त पथ तथा मैक्सवेल-बोल्ट्जमैन सांख्यिकी पर अनेक कार्य किए। वे कैम्ब्रिज मेंविश्व के प्रथम कैवेंडिश प्रोफेसर नियुक्त हुए। विज्ञान को जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए अनेक प्रयोग किए क्योंकि उनकी दृढ़ मान्यता थी कि वास्तविक विज्ञान वही है, जो सबके हित के लिए हो।

मैक्सवेल विश्व-प्रसिद्ध वैज्ञानिक तो थे ही साथ ही साथ उन्हें तैरने, घुड़सवारी करने और जिम्नास्टिक में भी अच्छी दक्षता प्राप्त थी। वे अच्छी कविताएं भी कर लेते थे। विज्ञान की सेवा करते हुए महान प्रतिभावाला यह वैज्ञानिक सन् 1879 में भगवान को प्यारा हो गया। यद्धपी दुनिया में आज मैक्सवेल नहीं है लेकिन उनके द्वारा दिया गया विद्युत-चुम्बकीय सिद्धांत हमेशा ही चलता रहेगा।