नये पायलटों को प्रशिक्षित करेगा नई पीढ़ी का ‘हंसा’                                                                 

      

प्रशिक्षण विमान ‘हंसा’ का नया एवं उन्नत संस्करण ‘हंसा-एनजी’

स्वदेशी वैमानिकी (एरोनॉटिक्स) क्षेत्र में नये आयाम गढ़ते हुए राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला यानी नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज (एनएएल) ने प्रशिक्षण विमान ‘हंसा’ का नया एवं उन्नत संस्करण ‘हंसा-एनजी’ तैयार किया है। इस साल के अंत तक इस विमान से उड़ानों का परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है। एनएएल वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) से जुड़ा एक उपक्रम है।

‘हंसा-एनजी’ को लेकर उड्डयन क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। एनएएल के निदेशक जितेंद्र जे. जाधव ने स्वयं इसकी पुष्टि की है। जाधव ने कहा है कि 'विभिन्न फ्लाइंग क्लबों से करीब 30 अभिरुचि पत्र हमें पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जो इस विमान की गुणवत्ता पर मुहर लगाते हैं।' ‘हंसा-एनजी’ में एनजी का अर्थ ‘न्यू जेनेरेशन’ है। विमान के प्रोटोटाइप ने वर्ष 1993 में उड़ान भरना शुरू किया था। कड़े परिक्षणों से गुजरने के बाद वर्ष 2000 में उसे मंजूरी प्रदान की गई।

वर्ष 2000 से 2007 के बीच एनएएल ने 12 हंसा विमान विकसित कर उन्हें विभिन्न फ्लाइंग क्लबों को उपलब्ध कराया। इन विमानों ने हवा में हजारों घंटे बिताए हैं। आईआईटी, कानपुर के पास उपलब्ध हंसा विमान तो हवा में 4000 घंटे गुजारने के बाद भी सक्रिय है।


स्वदेशी वैमानिकी (एरोनॉटिक्स) क्षेत्र में नये आयाम गढ़ते हुए राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला यानी नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज (एनएएल) ने प्रशिक्षण विमान ‘हंसा’ का नया एवं उन्नत संस्करण ‘हंसा-एनजी’ तैयार किया है। एनएएल वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) से जुड़ा एक उपक्रम है। ‘हंसा-एनजी’ में एनजी का अर्थ ‘न्यू जेनेरेशन’ है। विमान के प्रोटोटाइप ने वर्ष 1993 में उड़ान भरना शुरू किया था। कड़े परिक्षणों से गुजरने के बाद वर्ष 2000 में उसे मंजूरी प्रदान की गई। वर्ष 2000 से 2007 के बीच एनएएल ने 12 हंसा विमान विकसित कर उन्हें विभिन्न फ्लाइंग क्लबों को उपलब्ध कराया। इन विमानों ने हवा में हजारों घंटे बिताए हैं। आईआईटी, कानपुर के पास उपलब्ध हंसा विमान तो हवा में 4000 घंटे गुजारने के बाद भी सक्रिय है।

जाधव ने बताया, 'जब हमने हंसा विमान विकसित किया था तो उस समय उसके लिए कोई वास्तविक बाजार नहीं था। लेकिन, वर्ष 2016 में एनएएल में आने के बाद मैंने कोटा हरिनारायण की एक रिपोर्ट देखी, जिसमें उल्लेख था कि हंसा में व्यापक संभावनाएं हैं। परंतु, उससे जुड़ा कोई व्यावसायिक सर्वे नहीं हुआ। इस कार्य के लिए हमने एक पेशेवर एजेंसी की मदद ली, जिसने संस्तुति दी कि अगले पाँच वर्षों के दौरान हंसा जैसे करीब 100 विमानों के लिए बाजार में माँग उत्पन्न होने की संभावना है। इसके बाद हमने ‘हंसा-एनजी’ विकसित करने का निर्णय लिया।’

केंद्र सरकार ने तीन वर्ष पहले 2018 में ‘हंसा-एनजी’ को स्वीकृति प्रदान की। इसमें ग्लास कॉकपिट लगा है। इसे नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से भी हरी झंडी मिल चुकी है। वर्ष 2019 की एयरो इंडिया प्रदर्शनी में इसे प्रदर्शित भी किया गया था। इसके बाद एनएएल ने मेस्को एयरोस्पेस लिमिटेड के साथ साझेदारी में इसके उत्पादन की योजना बनायी है। इस साझेदारी का लक्ष्य कम लागत में बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रशिक्षण विमान विकसित करना था। उसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर ‘हंसा-एनजी’ का डिजाइन तैयार किया गया है। ‘हंसा-एनजी’ अपनी श्रेणी में किफायती दरों पर उपलब्ध ऐसे प्रशिक्षण विमान के रूप में विकसित हुआ, जो प्रदर्शन के पैमाने पर भी बहुत दमदार है।

एनएएल द्वारा उपलब्ध करायी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार ‘हंसा-एनजी’ आइएफआर कंप्लिएंट एवियोनिक्स, स्मार्ट मल्टी फंक्शनल डिस्प्ले, ग्लास कॉकपिट और बबल कैनोपी डिजाइन से लैस है। इसमें रॉटेक्स 912 आइएससी जैसा दमदार इंजन लगा है, जो पूरी तरह डिजिटल रूप से नियंत्रित होता है।


इंडिया साइंस वायर

ISW/RM/HIN/01/04/2021

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