सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में विकसित हो रही फूलों की उन्नत किस्में                                                                 

      

देश में फूलों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सीएसआईआर ( वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद) के ‘फूलों की खेती अभियान’ के शुभारंभ की घोषणा की है। इसके लिए नई दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फूलों की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में किसानों को लगभग पांच गुना अधिक तक लाभ देने में सक्षम है। यह पहल किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की एक कड़ी है। इसके लिए डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों का आह्वान करते हुए कहा कि इसे सफल बनाने और अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में इसके उन्नत मॉडल विकसित किए जाए। इससे फूल-उत्पादन के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।

सरकार ने हाल में ही ‘फूलों की खेती के लिए सीएसआईआर के अभियान’ को हरी झंडी दिखाई थी। आरंभिक स्तर पर इसे देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। इसके लिए सीएसआईआर के संस्थानों में उपलब्ध जानकारियों का उपयोग किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से देश के किसानों और उद्योगों को निर्यात-स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह अभियान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), निदेशक-बागवानी खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य मंत्रालय, ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड), खुशबू और स्वाद विकास केंद्र (एफएफडीसी) कन्नौज, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) और विश्वविद्यालयों के सहयोग से चलाया जा रहा है।

फूलों की खेत से होने वाले फायदों पर डॉ.हर्षवर्धन ने कहा, “किसानों को फूलों की खेती के बारे में बहुत कम जानकारी है। यह परंपरागत फसलों की तुलना में 5 गुना अधिक लाभ दे सकती है। इसमें नर्सरी , फूलों की खेती, नर्सरी व्यापार के लिए उद्यमिता विकास, मूल्य संवर्धन और निर्यात के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत में विविध कृषि-जलवायु, विभिन्न तरह की मिट्टी और समृद्ध पादप विविधता के बावजूद फूलों की खेती के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 0.6 प्रतिशत हिस्सा है। इसका नतीजा यह है कि भारत विभिन्न देशों से हर साल कम से कम 1200 मिलियन अमरीकी डॉलर के फूल का आयात करता है।


देश में फूलों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सीएसआईआर ( वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद) के ‘फूलों की खेती अभियान’ के शुभारंभ की घोषणा की है। इसके लिए नई दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फूलों की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में किसानों को लगभग पांच गुना अधिक तक लाभ देने में सक्षम है। यह पहल किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की एक कड़ी है।

सीएसआईआर वर्ष 1953 से फूलों की नई किस्मों और कई मूल्यवर्धन प्रौद्योगिकियों का विकास कर रहा है। सीएसआईआर द्वारा, कृषि-प्रौद्योगिकियों, फूलों की नई किस्मों और सीएसआईआर के संस्थानों में उपलब्ध मूल्यवर्धित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों और उद्यमियों को उनकी आय बढ़ाने की दिशा में लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाजार तक पुष्प उत्पादों को पहुंचाने और उनके व्यापार के मुद्दों को एपीडा (एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी), राज्य बागवानी विभागों और ट्राइफेड (ट्राइबल कोपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया) की साझेदारी से हल किया जाएगा। अभियान में फूलों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़ने की परिकल्पना के अधिक लाभदायी होने की बात कही जा रही है|

सीएसआईआर द्वारा शुरू किये गए फूलों की खेती अभियान से उद्यमिता विकास और रोजगार के बड़े अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इस अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिए वाणिज्यिक फूलों की खेती, मौसमी तथा सालभर होने वाले फूलों की खेती, जंगली फूलों की फसलों पर ध्यान दिया जाएगा। कुछ लोकप्रिय फूलों की फसलों में ग्लैडियोलस, कन्ना, कार्नेशन, गुलदाउदी, जरबेरा, लिलियम, मैरीगोल्ड, रोज, ट्यूबरोज आदि शामिल हैं। वर्ष 2018 में भारतीय फूलों की खेती का बाजार 15700 करोड़ रुपये का था। 2019-24 के दौरान इसके 47200 करोड़ रुपये तक का हो जाने का अनुमान है।

डॉ हर्षवर्धन ने इस अवसर पर एंड्रायड ऐप के साथ सीएसआईआर का सामाजिक पोर्टल भी जारी किया। इस पोर्टल को सीएसआईआर की टीम ने माईजीओवी की टीम की मदद से विकसित किया है। यह पोर्टल लोगों को सामाजिक समस्याओं का हल विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों की मदद से तलाशने की सुविधा प्रदान करता है। यह समाज में विभिन्न हितधारकों के समक्ष मौजूद चुनौतियों और समस्याओं पर उनकी राय जानने की दिशा में पहला कदम है। डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों से इस पोर्टल को लोगों की समस्याओं को व्यक्त करने और उनका वैज्ञानिक हल निकालने के लिए सबसे अधिक लोकप्रिय पोर्टल बनाने का आह्वान किया।


इंडिया साइंस वायर

ISW/RM/HIN/08/03/2021

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