टेलीविजन विज्ञान कार्यक्रम

टेलीविजन विज्ञान कार्यक्रम विज्ञान प्रसार की महत्वपूर्ण गतिविधि है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलूओं पर अनेक भारतीय भाषाओं में निर्मित कार्यक्रम विज्ञान का प्रसार करने के साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जागरूकता के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस डिजिटल युग में, दुनिया के अधिकांश लोग टेलीविजन और नए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। तो यह तर्क दिया जा सकता है कि विज्ञान संचार के लिए टेलीविजन सबसे अधिक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है। इस दृष्टिकोण के साथ, विज्ञान प्रसार ने अपनी स्थापना के बाद से ही विज्ञान संचार के लिए टेलीविजन का उपयोग शुरू कर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर आधारित कई कार्यक्रमों का निर्माण किया है। विज्ञान तभी आज जनता का विज्ञान बन सकता है, जब वे विज्ञान संचार में अपनी भागीदारी दर्ज करा पाएं। विज्ञान प्रसार के विज्ञान धारावाहिक/विज्ञान फिल्मों/वृत्तचित्र प्रयोगशालाओं और लोगों के बीच अंतर को कम करने का एक प्रयास है। “विज्ञान हर जगह और हर किसी के लिए है” यही सिद्धांत हमारी सभी गतिविधियों का मार्गदर्शक है।

टेलीविजन प्रभाग के गतिविधियां निम्नानुसार हैं:
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित फिल्मों/धारावाहिकों/ विज्ञान समाचार कार्यक्रमों/वृत्तचित्रों/क्विज़ शो /स्पॉट इत्यादि का निर्माण करना।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित फिल्म बनाने की दिशा में फिल्म निर्माताओं/संस्थाओं को आकर्षित करना।
  • भारतीय टेलीविजन पर वैज्ञानिक सामग्री को बढ़ाने के लिए विभिन्न चैनलों पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित वीडियो कार्यक्रमों का प्रसारण करना ।
  • कई अन्य भारतीय भाषाओं में विज्ञान प्रसार के कार्यक्रमों की डबिंग करना ।
  • फिल्म आधारित विज्ञान संचार को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों एवं विज्ञान क्लबों में विज्ञान फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन करना।
  • नेटवर्किंग, संसाधन साझाकरण के लिए अन्य संगठनों के साथ सहयोग करना।
  • वीडियो कार्यक्रमों की बिक्री के लिए सीडी/वीसीडी/डीवीडी आदि को उपल्बध कराना।
कार्यक्रम निर्माण:

नये विषयों/थीमों पर आरंभिक शोध के उपंरात अनुसंधान कार्य को अंतिम रूप देने के बाद विज्ञान प्रसार निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कार्यक्रम निर्माण का कार्य आउटसोर्स किया जाता है। विज्ञापन एवं वेबसाईट के माध्यम से निविदा विज्ञापन की घोषणा के बाद फिल्म निर्माताओं/ व्यक्तियों/संस्थाओं/फर्मों को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम बनाने के लिए विज्ञान प्रसार का निम्नलिखित दृष्टिकोण होता है:

  • कार्यक्रमों का मुख्य लक्ष्य नागरिकों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी के विकास और नवाचार के बारे में जागरूक करने के साथ रोजमर्रा के जीवन में उनके उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
  • कार्यक्रमों को मुख्य रूप से भारतीय परिप्रेक्ष्य के अनुसार लक्ष्यित होना चाहिए।
  • कार्यक्रमों को दिलचस्प बनाने के लिए विभिन्न प्रारूपों का उपयोग किया जाता है जिससे वो रोचक बन सकें।
  • एनीमेशन और कंप्यूटर ग्राफिक्स का उपयोग करके कार्यक्रमों को रोचक और सुबोध होना चाहिए।
  • कार्यक्रम सहभागी और इंटरैक्टिव होने चाहिए।
  • कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से प्रामाणिक, सटीक और दिलचस्प एवं रोमांचक होने चाहिए।
प्रसारण:

विज्ञान प्रसार द्वारा अपने कार्यक्रमों को विभिन्न 17 टीवी चैनलों से प्रसारित कर रहा है। वर्ष 2007 में प्रसार भारती के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसके अनुसार विज्ञान प्रसार विज्ञान कार्यक्रम का निर्माण करेगा और दूरदर्शन अपने चैनलों के माध्यम से उन्हें प्रसारित करेगा। तब से विज्ञान प्रसार कार्यक्रमों का प्रसारण दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल, डीडी—भारती, डीडी—उर्दू, डीडी—इंडिया, डीडी—किसान और दूरदर्शन के अन्य 10 क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। विज्ञान प्रसार ने राज्यसभा टीवी और लोकसभा टीवी के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। विज्ञान प्रसार द्वारा साप्ताहिक विज्ञान समाचार आधारित कार्यक्रम का भी निर्माण किया जा रहा है।

लक्षित दर्शक:

विज्ञान प्रसार के पास दर्शकों का एक बहुत व्यापक वर्ग है जिसमें शहरी और ग्रामीण दर्शकों, शिक्षित, श्रमिक और अन्य पेशेवर वर्ग सहित युवा और विद्यार्थी शामिल हैं।

उपलब्धियां:

विज्ञान प्रसार ने न केवल हिंदी और अंग्रेजी में बल्कि अन्य दस भारतीय भाषाओं असमिया, बंगाली, गुजराती, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तेलुगू, तमिल और उर्दू में भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न विषयों पर दो हजार से अधिक कड़ियों को निर्माण किया है। वर्तमान में विज्ञान प्रसार प्रति वर्ष लगभग 300 एपिसोड/150 घंटे विज्ञान कार्यक्रम का निर्माण कर रहा है। कुछ महत्वपूर्ण वीडियो विज्ञान धारावाहिक/वृत्तचित्र/फिल्में इस प्रकार हैं:

  • 52-एपिसोड सीरियल “ऐसा ही होता है” (विज्ञान में जिज्ञासा पर निर्मित) संयुक्त रूप से डेकू, इसरो के साथ ।
  • 13-एपिसोड सीरियल “कहानी धरती की” (पृथ्वी ग्रह पर निर्मित) ।
  • 13- एपिसोड सीरियल “तारों की सैर” (खगोलविज्ञान पर निर्मित) ।
  • 26-एपिसोड सीरीयल “जीते रहो” (स्वास्थ्य पर निर्मित) डेकू, इसरो के साथ संयुक्त रूप से निर्मित
  • 26- एपिसोड सीरियल “क्वेशन ऑफ साइंस” (अभिनव वैज्ञानिक खोजों पर आधारित) ।
  • 13-एपिसोड धारावाहिक “बातें राज़ की” (दैनिक जीवन में विज्ञान पर आधारित) ।
  • 13-एपिसोड धारावाहिक “साइंटिफिकली यूअर्स” (वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित) निस्केयर के साथ संयुक्त रूप से निर्मित ।
  • 13-एपिसोड सीरियल “द गणित फैक्टर” (गणित पर आधारित) ।
  • 26- एपिसोड का हिस्सा धारा ‘कुछ तुक्के…कुछ तीर’ (प्रयोग जिन्होंने दुनिया बदल दी) ।
  • 13-एपिसोड “कहानी रसायन विज्ञान की” (रसायन विज्ञान पर आधारित) ।
  • 52-एपिसोड धारावाहिक “खुदबुद” (प्रयोगों पर आधारित) ।
  • 12- वृत्तचित्र भारतीय वैज्ञानिकों के जीवन और कार्यों पर आधारित ।
  • 10 – वृत्तचित्र विभिन्न अभियानों जैसे सूर्यग्रहण, शुक्र पारगमन, भौतिकी वर्ष सहित विशेष कार्यक्रमों जैसे तीस मीटर टेलिस्कोप, लार्ज हेड्रान कोलाईडर, चंद्रयान मिशन, डे टाईम एस्ट्रोनॉमी, इंस्पायर, प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर आधारित ।
साप्ताहिक विज्ञान समाचार कार्यक्रम:

विज्ञान प्रसार द्वारा वर्ष 2010-11 में लोकसभा टेलीविजन (एलएसटीवी) से हिंदी में साप्ताहिक विज्ञान समाचार कार्यक्रम विज्ञान मॉनिटर और हिंदी में ज्ञान विज्ञान का प्रसारण शुरू किया गया। अब यह समाचार कार्यक्रम राज्यसभा टेलीविजन (आरएसटीवी) से नियमित रूप से प्रसारित किया जा रहा है।

संसाधन का साझा:

विज्ञान प्रसार के कार्यक्रमों को विज्ञान प्रसार यूट्यूब चैनल, सीएसआईआर—निस्केयर-ट्यूब and National Repository of Open Educational Resources (NROER) of NCERT etc.

फिल्मों की स्क्रीनिंग:

विज्ञान प्रसार नियमित रूप से स्कूलों/विज्ञान क्लब/कॉलेजों आदि के विद्यार्थियों के लिए अपनी फिल्मों की स्क्रीनिंग करता है। इसके अलावा विभिन्न भारतीय या अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी फिल्मों को प्रेषित करता है। इसके अतिरिक्त 2011 से विज्ञान प्रसार अपने स्वयं के राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म समारोह/राष्ट्रीय विज्ञान चलचित्र मेला (आरवीसीएम) का आयोजन कर रहा है।

दृश्य—श्रृव्य सामग्री की खरीद:

अधिकांश निर्मित दृश्य—श्रृव्य कार्यक्रम प्रोग्राम अब सीडी/वीसीडी/डीवीडी के रूप में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। बिक्री के लिए उपलब्ध दृश्य—श्रृव्य कार्यक्रमों की एक सूची दृश्य—श्रृव्य कैटलॉग में दी गई है। ये संसाधन सामग्री विज्ञान प्रसार के पक्ष में एक बैंक ड्राफ्ट भेजकर प्राप्त की जा सकती है। सामग्री की उपलब्धता को आदेश देने से पहले दूरभाष क्रमांक 0120-2404427 या href=”mailto:info@vigyanprasar.gov.in”>info@vigyanprasar.gov.in पर विज्ञान प्रसार के बिक्री और खरीद विभाग के साथ जांच की जा सकती है। आप ऑनलाईन आर्डर देकर भी कार्यक्रमों की सीडी/वीसीडी/डीवीडी को प्राप्त कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें:

कपिल के त्रिपाठी वैज्ञानिक ई & और प्रमुख, टेलीविजन विज्ञान कार्यक्रम
ईमेल: – kapil[at]vigyanprasar[dot]gov[dot]in
दूरभाष: 0120-2401721

सचिन सी नरवाडिया , वैज्ञानिक सी
ईमेल:-sachin[at]vigyanprasar[dot]gov[dot]in
दूरभाष:-011-26967532

नवनीत कुमार गुप्ता परियोजना अधिकारी-एजूसैट
ई-मेल:ngupta@vigyanprasar.gov.in दूरभाष: -011-26967532